Saturday, April 11, 2009

प्रदीप की कोम्पेरिंग का जलवा ०९४२५०२०९७०

प्रदीप दुबे का अंदाज़ यकीनन आपको पसंद आएगा आप मुझे बुला भी सकते हो मुझे मेल करो .साहित्यक मंच सञ्चालन के लिए ,गोल्डन वौइस् ऑफ़ रायपुर 9425020970 par

कविता - हरदम रोती मधुशाला

बच्चन का दौर और आज का दौर एक दम अलग है । तब प्यार था अवसाद नही था घृणा नही थी । तब हाला लावान्यमायी थी आज की तरह घृणा पैदा नही करती थी .मैंने लिखी आज की मधुशाला .आप भी पढिए
कृति krititva की विकृत हो गई जहर हो गई मधुशाला
भावः मेरे निष्पंद हो गए सूने सारे छंद HO गए
सूख गया अमृत प्याला
मन्दिर मस्जिद के झगडे ,अश्रु बहाती मधुशाला ,
आँखों के खुनी तेवर से ,सहम रही सुरभित हाला
खून के प्यासे खून पी रहे है जूनून माँ मतवाले
आँखों माँ अब प्यार नही ही घृणा और अवसाद यही है
कैसी थिरकन कैसी मस्ती बसुध है पीने वाला
किसका मन्दिर किसकी मस्जिद
यहाँ आग वहा गोली है
भ्रष्टाचारी दावानल है राजनीती की बोली है
संत म्हणतो की बकबक से तूफानों का तांडव है
पाँच पाँच के गुट मे बटकर कौरव बनते पांडव है
द्रौपदी का सा चीर बचाती छुपती फिरती मधुशाला
श्याम नही आब आने वाले जान चुकी है मधुशाला
सिक्को की खनखन मे खोया सच्चाई का रखवाला
नए दौर मे लाज लुटाती खूब रो रही मधुशाला






Wednesday, April 1, 2009

प्रदीप का सफरनामा

संगीत कार्यक्रमों का ३० बरस से सञ्चालन करते हुए जो जानकारिया पास में आई अब उन्हें प्रकाशित करना है .खास तौर पर छत्तीसगढ़ के फ़िल्म जगत की जानकारिया .तो देखते रहिये प्रदीप का सफरनामा