Saturday, July 25, 2009
Wednesday, July 15, 2009
Monday, June 15, 2009
रेल का भ्रस्ताचार
हमारे देश की गाड़ियों में यात्रा रेल भ्रष्टाचार से कितनी कठिन हूँ गयी है अब इसका विरोध ज़रूरी हो गया है । ३० रुपये से लेकर १०० रुपये रिश्वत लेकर चेकिंग स्टाफ रिजर्वेशन डिब्बे में लोगों को यात्रा करते है और ७२ व्यकित की जगह डिब्बे मे १५० लोग भर देते है याने वे तो हर डिब्बे से ४०००-५००० कमाते है और रिसेर्वेशन करा कर यात्रा करने वाला परेशां होता रहता है । मे सोचता हूँ की क्यों न कुछ वीडियो फ़िल्म बना कर रेल मंत्री तथा रेल हेड कवार्टर को भेजी जाए ताकी इक शुरूआत हो विरोध की
Saturday, April 11, 2009
प्रदीप की कोम्पेरिंग का जलवा ०९४२५०२०९७०
प्रदीप दुबे का अंदाज़ यकीनन आपको पसंद आएगा आप मुझे बुला भी सकते हो मुझे मेल करो .साहित्यक मंच सञ्चालन के लिए ,गोल्डन वौइस् ऑफ़ रायपुर 9425020970 par
कविता - हरदम रोती मधुशाला
बच्चन का दौर और आज का दौर एक दम अलग है । तब प्यार था अवसाद नही था घृणा नही थी । तब हाला लावान्यमायी थी आज की तरह घृणा पैदा नही करती थी .मैंने लिखी आज की मधुशाला .आप भी पढिए
कृति krititva की विकृत हो गई जहर हो गई मधुशाला
भावः मेरे निष्पंद हो गए सूने सारे छंद HO गए
सूख गया अमृत प्याला
मन्दिर मस्जिद के झगडे ,अश्रु बहाती मधुशाला ,
आँखों के खुनी तेवर से ,सहम रही सुरभित हाला
खून के प्यासे खून पी रहे है जूनून माँ मतवाले
आँखों माँ अब प्यार नही ही घृणा और अवसाद यही है
कैसी थिरकन कैसी मस्ती बसुध है पीने वाला
किसका मन्दिर किसकी मस्जिद
यहाँ आग वहा गोली है
भ्रष्टाचारी दावानल है राजनीती की बोली है
संत म्हणतो की बकबक से तूफानों का तांडव है
पाँच पाँच के गुट मे बटकर कौरव बनते पांडव है
द्रौपदी का सा चीर बचाती छुपती फिरती मधुशाला
श्याम नही आब आने वाले जान चुकी है मधुशाला
सिक्को की खनखन मे खोया सच्चाई का रखवाला
नए दौर मे लाज लुटाती खूब रो रही मधुशाला
कृति krititva की विकृत हो गई जहर हो गई मधुशाला
भावः मेरे निष्पंद हो गए सूने सारे छंद HO गए
सूख गया अमृत प्याला
मन्दिर मस्जिद के झगडे ,अश्रु बहाती मधुशाला ,
आँखों के खुनी तेवर से ,सहम रही सुरभित हाला
खून के प्यासे खून पी रहे है जूनून माँ मतवाले
आँखों माँ अब प्यार नही ही घृणा और अवसाद यही है
कैसी थिरकन कैसी मस्ती बसुध है पीने वाला
किसका मन्दिर किसकी मस्जिद
यहाँ आग वहा गोली है
भ्रष्टाचारी दावानल है राजनीती की बोली है
संत म्हणतो की बकबक से तूफानों का तांडव है
पाँच पाँच के गुट मे बटकर कौरव बनते पांडव है
द्रौपदी का सा चीर बचाती छुपती फिरती मधुशाला
श्याम नही आब आने वाले जान चुकी है मधुशाला
सिक्को की खनखन मे खोया सच्चाई का रखवाला
नए दौर मे लाज लुटाती खूब रो रही मधुशाला
Wednesday, April 1, 2009
प्रदीप का सफरनामा
संगीत कार्यक्रमों का ३० बरस से सञ्चालन करते हुए जो जानकारिया पास में आई अब उन्हें प्रकाशित करना है .खास तौर पर छत्तीसगढ़ के फ़िल्म जगत की जानकारिया .तो देखते रहिये प्रदीप का सफरनामा
Tuesday, March 24, 2009
Sunday, March 22, 2009
chanki yukta mukhi ke sath
hi watch me with yukta mukhi and chanki pandey
Pradeep Dubey
09425020970
Raipur Chattisgarh
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